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चिकित्सा शिक्षा
भारत में न सिर्फ गाँवों और शहरों के बीच बल्कि अलग-अलग राज्यों के बीच भी स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण में बहुत अंतर है। चिकित्सा शिक्षा देने वाले सभी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज शहरी इलाकों में हैं, जहाँ सिर्फ 30-35 प्रतिशत आबादी रहती है। स्वास्थ्य परिणाम बताते हैं कि पिछले 60 वर्ष के दौरान चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम इन दोनों स्थितियों को बदलने में नाकामयाब रहे हैं। अत: हमें अपनी स्वास्थ्य व्यवस्था में जबर्दस्त बदलाव की करना होगा ताकि मौजूदा मेडिकल कॉलेजों का स्तर सुधारने के लिए आवश्यक परिवर्तन किए जा सकें और मेडिकल कॉलेजों को चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान और टैक्नॉलॉजी में हुई जबर्दस्त प्रगति के अनुरूप ढाला जा सके। साथ ही गाँवों में चिकित्सा शिक्षा की कमी की समस्या पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए मौजूदा कॉलेजों में ऐसे अभिनव प्रयास अपनाने होंगे, जिनसे हमारी ज़रूरतों के अनुसार ग्रामीण चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम चलाए जा सकें और ग्रामीण चिकित्सकों को देश के मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के भीतर ही प्रशिक्षण दिया जा सके।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग निम्नलिखित विषयों पर विचार कर रहा है:
- पाठयक्रम, शिक्षण, बुनियादी सुविधाओं, प्रशासन और सुलभता से जुड़ी सीमाएँ, समस्याएँ और चुनौतियाँ;
- औसत स्तर सुधारने और संशोधित प्रमाणीकरण प्रणाली सहित उत्कृष्टता के केन्द्र बनाने का तंत्र;
- प्रतिभावान शिक्षकों को आकर्षित करने और संस्थाओं में बने रहने के लिए प्रेरित करने के तरीके;
- मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण अस्पतालों में अनुसंधान की परंपरा को बढ़ावा देना और जारी रखना;
- पैरा-मेडिकल विषयों में पेशेवर शिक्षा को मजबूत करना;
- चिकित्सा शिक्षा, जनस्वास्थ्य और सेवा प्रदान करने की व्यवस्था में तालमेल पैदा करना;
- वैकल्पिक चिकित्सा पध्दतियों की शिक्षा का विकास करना।
| अन्य चिकित्सा शिक्षा लिंक : |
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