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प्रबंधन शिक्षा
हाल के वर्षों में हमारे देश में व्यावसायिक शिक्षा संस्थानों की बाढ़ सी आ गई है। 1990 के दशक के शुरू से देश में ज्यादातर निजी पूंजी से जितनी बड़ी संख्या में तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा संस्थान खुले हैं उतने पहले कभी नहीं खुले। प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में भारत में 1200 से अधिक संस्थाएँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर पढ़ाई की सुविधा दे रही हैं। इन संस्थानों से निकलने वाले प्रबंधन स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री- धारी युवक युवतियों को मूल रूप से उद्योगों में काम मिलता है। इसलिए इस बात की ज़रूरत बढ़ती जा रही है कि प्रबंधन शिक्षा का पाठयक्रम और ढाँचा ऐसा हो जो भारत की ज़रूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर सके और देश के भीतर औद्योगिक तथा सेवा क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों के अनुसार ढल सके। इतना ही नहीं यह मूल्याँकन करना भी ज़रूरी है कि विभिन्न संस्थानों में दी जा रही प्रबंधन शिक्षा का स्तर कैसा है, जिससे उन्हें नौकरी देने वाले भर्ती और चयन के समय सही ढंग से फैसला कर सकें।
राष्ट्रीय ज्ञान आयोग निम्नलिखित कुछ विषयों पर विचार कर रहा है::
- पाठयक्रम, शिक्षण, बुनियादी सुविधाओं, प्रशासन और सुलभता से जुड़ी सीमाएँ, समस्याएँ और चुनौतियाँ;
- जनप्रणालियों (राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन सहित) के प्रबंधन में शिक्षण और अनुसंधान को मज़बूत करने, विनियमन ढाँचों और जननीति को मज़बूत करने के तरीके;
- प्रतिभावान शिक्षकों को आकर्षित करने और संस्थाओं में बने रहने के लिए प्रेरित करने के तरीके;
- प्रबंधन शिक्षा में शोध को बढ़ावा देने और उसे जारी रखने के उपाय;
- संस्थाओं की स्वायत्ता और जवाबदेही से जुड़े विषय;
- समाज के व्यापक संदर्भ में प्रबंधन शिक्षा में स्तर को ऊपर उठाने और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के अभिनव उपाय।
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